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21 September 2017

मैं देवी हूँ -5 (नवरात्रि विशेष)

यह समाज
यह आस-पड़ोस
यह रिश्ते-नाते
क्या सच में मेरे हैं
क्या सच में अपने हैं
या बस
यूं ही
अपने भीतर की
तमाम कुंठाओं का
प्रतिरूप
अपने स्मार्ट फोन की
स्क्रीन पर देखते हुए
तुम में से
कुछ लोग
करते रहोगे
छद्म गुणगान
जगरातों की
पैरोडी सुर-ताल पर।
मुझे पता है
तुम सबका असली रूप
मुझे मालूम है
तुम्हारे मन के
भीतर की एक-एक बात
एक-एक राज़
जो तुम्हारे चेहरे
और तुम्हारी नज़रें
खुद ही बता देती हैं
बस-ट्रेन और टेम्पो के भीतर
खुली सड़क पर
और हर
उस जगह
जहां मुझ पर
सवाल उठाने वाले
खुद ही बन जाते हैं
प्रश्न चिह्न
क्योंकि
मैं ही समिधा
और यज्ञ की वेदी हूँ
मैं देवी हूँ!

-यश©


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10 September 2017

नहीं कोई साथ निभाने को....

समय के चक्रव्यूह में फँसकर 
नहीं बचा कुछ पाने को। 
उखड़ती साँसों से क्या कहना 
अमृत को चख जाने को।  
बहरूपियों के जीवन मंच पर 
कठपुतलियाँ खेल दिखाती हैं।  
जैसा जो कोई कहता जाता 
बस वैसा करती जातीं हैं।  
अपनी अपनी राहों पर सब 
जुटे हैं मंज़िल पाने को।  
गैरों में किसको खुद का समझें 
नहीं कोई साथ निभाने को। 

-यश©
10/09/2017 


24 August 2017

रोलर कोस्टर ज़िन्दगी

रोलर कोस्टर ज़िन्दगी.....
अपने उतार चढ़ावों के 
एक एक पल में 
समेटे रहती है ....
जाने कितनी ही खुशियाँ 
और कितने ही गम .....
फिर भी रहते हैं हम 
वैसे ही.....
कल आज और 
कल की तरह...
थोड़े से शान्त 
थोड़े से उतावले 
टिक-टिक करती 
बढ़ती जातीं 
घड़ी की सुइयों 
के पग चिह्नों को 
नापते जाने के 
कई सफल-असफल 
प्रयासों के साथ 
कभी 
खुशियों से नाचते-गाते 
और कभी 
सर झुकाए 
किसी सोच में डूब कर 
आँखों से बहने को बेकरार 
सैलाब को थाम कर 
रोलर कोस्टर ज़िन्दगी
बंद पलकों के भीतर 
दिखाती है 
आरंभ से अंत का 
एक अंतहीन 
चलचित्र!

-यश©
24/08/2017

17 August 2017

हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे....

हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे
एक कहानी होती है
जिसे सुनकर हँसती दुनिया
या कभी कभी वह रोती है  ।

कोई कहता हँसता है वह
कोई कहता पागल है
ऐसी कैसी उसकी फितरत
भीतर से वह घायल है

मिल कर गले कोई नहीं
जो सुनकर मन की बातों को
अपने ढंग से देख समझ कर
दिखला दे नयी राहों को

जीवन की आपा-धापी में
एक धार बहानी होती है
हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे
एक कहानी होती है।


-यश ©
17/08/2017

15 August 2017

तिरंगे में पुते चेहरे दिखने लगे हैं

तिरंगे में पुते चेहरे दिखने लगे हैं 
तिरंगे फिजा में लहरने लगे हैं 
ये कुछ पल का नज़ारा है मानो न मानो 
फिर तो बस शाम को बुहरने लगे हैं 

करके सुबह सलाम,बस इतना सा करना
चूने की सड़कों पे संभल संभल के चलना 

न आए पैरों तले, न बेकद्री से बिखरे 
मेरा देश और ये झण्डा खूब खुशियों से निखरे 

-यश-©

आप सभी को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ !
खुद को सावधान रखें...तिरंगे का मान रखें !
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